अगर टाइम पर कोई बाते नहीं कही जाये तो भी हमारा communication कमजोर होता है ,क्योकि किसी भी बात का प्रभाब तभी सही होता है जब वो समय रहते कही जाये और इस प्रकार कही जाये की सामने वाला उसको स्पष्ट समझे, में आपको ये बाते कुछ ऐसे उद्धरण के साथ समझती हूँ
असफल communication
"एक तितली को एक गुलाब के फूल से बहुत प्यार था, उसने एक दिन गुलाब से कहा की में आपको बहुत प्यार करती हूँ / किन्तु गुलाब ने सोचा प्यार तो में भी बहुत करता हूँ इस को लेकिन अभी बोलूँगा तो कही ये मुझे गलत न समझे क्यों न में थोडा रुक कर इससे अपने प्यार का इजहार करू उसने तितली से कहा में थोडा सोच कर आपके प्यार का उतर दे पाऊंगा तितली ने समय माँगा वो बोला जब में पूरी तरह लाल हो जाऊ तितली ने ठीक है कहा और गुलाब के चारो तरफ इन्तिजार कर घुमने लगी जिसके कारण काँटों की चुभन से वो घायल हो कर मर गयी और फूल उसको खो बैठा/"
यहाँ तितली का communication साफ़ था परन्तु गुलाब ने समय को ध्यान में नहीं रखा इसलिए ये communication एक असफल communication बन गया / इसलिए किसी भी communication में समय एक विशेष रोल रखता है /
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